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उत्तर बिहार : दो दिनों की लगातार बारिश के बाद कई इलाके हुए जलमग्न, घर छोड़कर सड़क पर रह रहे लोग

 


बारिश थमने से रविवार को उत्तर बिहार की नदियों के उफान में कमी आई है। इसके बावजूद दरभंगा, समस्तीपुर, पूर्वी चंपारण, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, शिवहर मुजफ्फरपुर में बाढ़ से जनजीवन बेहाल है। इन जिलों के पचास से अधिक गांव बाढ़ से घिर गए हैं। प्रमुख सड़कों पर पानी चढ़ने से आवागमन ठप है।

पूर्वी चंपारण में हालत खराब होने पर एनडीआरएफ की मदद ली जा रही है। दरभंगा के दर्जनभर गांवों में बाढ़ का पानी दोबारा प्रवेश कर गया है। स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और सड़कें पानी में डूब गई हैं। पश्चिम चंपारण में भी घरों में पानी घुसने से पीडि़त परिवार मवेशियों के साथ सुरक्षित स्थानों पर शरण ले रहे हैं। मुजफ्फरपुर के औराई कटरा के दो दर्जन से अधिक सड़कों पर पानी चढ़ने से आवागमन ठप है। बाढ़ पीडि़त नाव से आवागमन कर रहे हैं। समस्तीपुर में गंगा, बूढ़ी गंडक बागमती नदी के जलस्तर वृद्धि जारी है। बागमती के जलस्तर में वृद्धि से चकमेहसी में कलौंजर पंचायत के गंगौरा में मुख्य सड़क टूट गई। कल्याणपुर के मोरवाड़ा में बाढ़ का पानी कई घरों में प्रवेश कर गया है।


दरभंगा के कई गांवों में घुसा पानी, सड़कें डूबीं
दरभंगा में घनश्यामपुर प्रखंड से गुजरने वाली कमला नदी के दोनों तटबंधों के बीच बसे 10 गांवों में दोबारा बाढ़ आने से स्थिति विकराल है। बाढ़ के पानी में बाऊर-घनश्यामपुर के बीच बनी प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क डूबने से आवागमन ठप है। प्रखंड के मध्य विद्यालय रसियारी, मध्य विद्यालय बाऊर कन्या विद्यालय समेत आधा दर्जन स्कूलों में पानी घुस गया है। तटबंध पर लगातार बढ़ रहे दबाव की वजह से रेनकट की मरम्मत की जा रही है। हनुमाननगर में भी बाढ़ की समस्या कायम है। पंचोभ पंचायत में हरिचन्दा-काली डीहलाही पथ पर पानी चढ़ने से आवागमन बाधित है। बागमती और अधवारा के जलस्तर में भी वृद्धि जारी है।

. चंपारण में पीडि़त परिवारों ने ली सड़कों पर शरण
पश्चिम चंपारण में गंडक,सिकरहना, पंडई, मसान समेत दर्जनभर नदियों में जलस्तर घटने लगा है, लेकिन बाढ़ से फिलहाल कोई राहत नहीं है। पीडि़त परिवारों ने मवेशियों के के साथ सड़कों पर शरण ले रखी है। सिकरहना में आई बाढ़ के कारण बेतिया-नरकटियागंज, लौरिया-नरकटियागंज लौरिया-रामनगर सड़क पर तीसरे दिन रविवार को भी आवागमन ठप रहा। इन सड़कों पर तीन से चार फीट पानी बह रहा है। लौरिया का अशोक स्तंभ परिसर अब भी पानी में डूबा है। रविवार को वाल्मीकिनगर बराज से 1.60 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया। इधर, मसान नदी रामनगर चौतरवा के दर्जनभर गांवों में तांडव मचा रही है। गौनाहा नरकटियागंज में पंडई हड़बोड़ा समेत आधा दर्जन पहाड़ी नदियों का पानी आधा दर्जन गांवों में घुस गया है। नरकटियागंज-बलथर पथ पर पानी बह रहा है, इससे सिकटा का संपर्क अनुमंडल कार्यालय से भंग हो गया है। सिकटा में रांगी नहर का तटबंध मघिया गांव के पश्चिम टूट गया। बेतिया-मैनाटांड़ पथ पर बाकपानपूर घोघा में सड़क पर पानी बह रहा है।

पूर्वी चंपारण के चार प्रखंडों की बड़ी आबादी प्रभावित
पूर्वी चंपारण के चार प्रखंडों में बाढ़ से बड़ी आबादी प्रभावित है। बंजरिया, केसरिया, संग्रामपुर सुगौली में नदियों का जलस्तर स्थिर रहने के बावजूद दर्जन भर गांव बाढ़ से घिरे हैं। संग्रामपुर प्रखंड के बाढ़ प्रभावित गांवों में एनडीआरएफ बचाव राहत कार्य चला रहा है। बंजरिया प्रखंड के कई गांवों का प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग है। सुगौली में सिकरहना नदी कई जगह कटाव कर रही है। गंडक चटिया, बूढ़ी गंडक नदी के लालबकेया गंडक बराज के जलस्तर में गिरावट आई है।

सीतामढ़ी के आधा दर्जन प्रखंड बाढ़ से प्रभावित
सीतामढ़ी जिले में बागमती अधवारा समूह की नदियों का जलस्तर घटना शुरू हो गया है। हालांकि बागमती चार जगहों पर अभी भी लाल निशान के पार है। अधवारा समूह की नदी का पानी नये इलाके में फैल रहा है। बाढ़ में धान सब्जी की फसल डूब जाने से किसानों को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचा है। जिले के दर्जनों घर बाढ़ के पानी से घिरे हुए है। वहीं, निचले इलाके के घरों में पानी घुसने से लोग उंचे स्थल पर शरण ले रहे हैं। जिले के सुरसंड, परिहार, डुमरा, रीगा, बाजपट्टी, पुपरी प्रखंड बाढ़ से प्रभावित है।


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