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" अवंतीपोरा मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को किया ढ़ेर "

 


जम्मू कश्मीर के पुलवामा जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में दो अज्ञात आतंकवादियों को मार गिराया गया। पुलिस ने इस बारे में जानकारी दी है एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर के अवंतीपुरा इलाके के सम्बूरा में आतंकवादियों के छिपे होने की गुप्त सूचना के आधार पर सुरक्षा बलों ने इलाके को घेर लिया एवं वहां तलाश अभियान चलाया।

उन्होंने बताया कि सुरक्षा बल इलाके में तलाश अभियान चला रहा थे, इसी दौरान आतंकवादियों ने उन पर गोली चला दी। सुरक्षा बलों ने भी जवाबी कार्रवाई की जिसके बाद यह मुठभेड़ शुरू हो गयी

अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ में दो आतंकवादियों को मार गिराया गया मारे गए आतंकवादियों की पहचान और वे किस समूह से जुड़े हुए थे, इस बारे में पता लगाया जा रहा है।

इससे पहले जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में शुक्रवार को सुरक्षाबलों ने दो आतंकियों को मार गिराया था। इस दौरान आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच भारी गोलीबारी हुई थी। सुरक्षाबलों ने आतंकियों की उपस्थिति की खुफिया जानकारी के आधार पर सर्च ऑपरेशन शुरू किया था।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ सेना और सुरक्षाबलों की कार्रवाई जारी है। सुरक्षाबलों की सख्ती के चलते स्थिति यह हो गई है कि आतंकियों के पास हथियारों की कमी पड़ गई है। वहीं पाकिस्तान में बैठे आतंकी घाटी में मौजूद आतंकियों के लिए हथियार मुहैया कराने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रहे हैं। जम्मू कश्मीर में ड्रोन के जरिए हथियार गिराए जाने के मामले भी सामने चुके हैं।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के लिए PLA वाले हथियार भेज रहा चीन, सीमा पार कराने के लिए हेक्साकॉप्टर्स, ड्रोन्स भी दिए :


आतंकवाद को लेकर घिरने पर अक्सर पाकिस्तान के लिए ढाल बनने वाला चीन जम्मू-कश्मीर में दहशतगर्दी बढ़ाने के लिए अपने सदाबहार दोस्त की मदद करने में जुटा है। चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) में इस्तेमाल किए जा रहे चाइनीज हेक्साकॉप्टर्स के जरिए आईएसआई समर्थित आतंकवादी संगठन हथियारों को जम्मू-कश्मीर में पहुंचा रहे हैं। खास बात यह है कि जिन राइफल्स को लेकर ये ड्रोन और हेक्साकॉप्टर्स भारतीय सीमा में घुस रहे हैं वे भी चीन की सरकारी हथियार कंपनी नोरिनको में बने होते हैं।   

संडे गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इन हेक्साकॉप्टर्स और T-97 राइफल्स को चीन सरकार ने सीपीईसी की सुरक्षा के बहाने पाकिस्तान फ्रंटियर फोर्स को सौंपा था। भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसियों का मानना है कि पिछले एक साल में जम्मू-कश्मीर में तेजी से आतंकवादी घटनाओं में कमी की वजह से बौखलाए पाकिस्तान की चीन मदद कर रहा है और अधिक से अधिक हथियारों को आतंकवादियों तक पहुंचाना चाहता है। 

ISI ने इन हेक्साकॉप्टर्स और ड्रोन्स का इस्तेमाल यह महसूस करने के बाद किया कि भारतीय सुरक्षा बल इस सिद्धांत पर काम करते हैं कि बिना किसी हथियार के घुसपैठ करने वाले पर फायरिंग ना की जाए। इसलिए आईएसआई ने यह तरीका निकाला कि आतंकवादी और हथियारों को अलग-अलग सीमा के पार भेजा जाए, ताकि एलओसी पर आतंकवादियों के मारे जाने का जोखिम कम हो जाए। 



जनवरी के बाद से सुरक्षा बलों ने कम से कम 15 घटनाओं में चाइनीज हथियार बरामद किए जिन्हें किसी व्यक्ति या एलओसी के नजदीक जब्त किया गया। केवल सितंबर में इस तरह के छह मामले सामने आए हैं। 23-24 सितंबर 2020 की रात सुरक्षाबलों ने दो लोगों को जम्मू से दक्षिण कश्मीर जाते हुए गिरफ्तार किया। इसके कब्जे से एक चाइना निर्मित T97 एनएसआर राइफल, 190 राउंड्स के साथ चार मैगजीन, एक एके 47 राइफल, 218 राउंड्स के साथ चार मैगजीन और तीन ग्रेनेड बरामद किए। पूछताछ में पता चला कि इन हथियारों को सांबा में ड्रोन से गिराया गया था। 

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, ''जम्मू कश्मीर में आतंकवादियों को हथियार पहुंचाने के लिए पाकिस्तान और चीन की मिलीभगत हर बीतते दिन के साथ अधिक स्पष्ट होती जा रही है। हमारे पास इस बात के कई सबूत हैं कि भारत में आतंकवाद फैलाने के लिए चाइनीज सामानों का इस्तेमाल किया जा रहा है।''

 

 


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