उत्तर प्रदेश के हाथरस में दरिंदगी की शिकार दलित लड़की का पुलिस ने आधी रात को जबरदस्ती अंतिम संस्कार कर दिया। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने बेटी के शव के आखिरी दर्शन भी नहीं करवाए। हालांकि प्रशासन ने इस मामले पर सफाई भी दी। उन्होंने कहा कि परिजनों की सहमति पर ही अंतिम संस्कार किया गया है। उधर इस मामले में यूपी सरकार घिरती नजर आ रही है। प्रधानमंत्री ने यूपी के मुख्यमंत्री से बात की है और कहा कि दोषियों के विरूद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभ्य समाज को झकझोर देने वाली घटना की जांच के लिये विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिये हैं। मुख्यमंत्री ने बुधवार सुबह ट्वीट कर बताया कि मामले की जांच तीन सदस्यीय एसआईटी टीम करेगी। विशेष जांच दल का नेतृत्व गृह सचिव भगवान स्वरूप करेंगे जबकि दो अन्य सदस्यों में पुलिस उपमहानिरीक्षक चंद्र प्रकाश और पीएसी कमांडेंट आगरा पूनम शामिल हैं।
दोषी कतई नहीं बचेंगे : योगी
योगी ने ट्वीट किया, 'हाथरस में बालिका के साथ घटित दुर्भाग्यपूर्ण घटना के दोषी कतई नहीं बचेंगे। प्रकरण की जांच हेतु विशेष जांच दल का गठन किया गया है। यह दल आगामी सात दिवस में अपनी रिपोर्ट देगा। त्वरित न्याय सुनिश्चित करने हेतु इस प्रकरण का मुकदमा फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलेगा। उन्होने कहा 'प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाथरस की घटना पर बात की है और कहा है कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए।
एक सप्ताह के भीतर एसआईटी अपनी रिपोर्ट प्रेषित करेगी : एसआईटी एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रेषित करेगी। सरकार मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराने के आदेश पहले ही कर चुकी है। इसके अलावा पीड़िता के परिजनो को दस लाख रुपए का मुआवजा दिया गया है। मामले में वांछित सभी चार आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख स्वाती मालीवाल ने चीफ जस्टिस को लिखा पत्र : दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल ने बुधवार को देश के चीफ जस्टिस को पत्र लिख कर उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया जो हाथरस सामूहिक बलात्कार एवं हत्याकांड की कथित रूप से लीपापोती करने में शामिल हैं। मालीवाल ने पत्र में हाईकोर्ट की देखरेख में मामले की जांच एवं सुनवाई सुनिश्चित कराने तथा आरोपियों को सख्त से सख्त सजा दिये जाने का भी अनुरोध किया है। यह पत्र सुप्रीमकोर्ट के न्यायाधीशों के नाम भी संबोधित किया गया है।
पत्र में मालीवाल ने अपने अनुरोध को सूचीबद्ध करते हुये कहा है, उन सभी पुलिसवालों एवं वरिष्ठतम अधिकारियों समेत प्रशासनिक अधिकारियों को निलंबित किया जाये और उनके खिलाफ कठोर कदम उठाया जाये जिन्होंने इस मामले पर लीपापोती का प्रयास किया है । ऐसी व्यवस्था बननी चाहिये कि किसी और बेटी के साथ इस तरह की घटना नहीं हो।
मालीवाल ने कहा कि हाथरस में 19 साल की दलित लड़की के साथ 4 लोगों द्वारा किया गया सामूहिक बलात्कार दिल को दहला गया है। पीडि़ता का 14 सितंबर को सामूहिक बलात्कार किया गया और जख्मी हालत में उसे खेतों में मरने के लिये छोड़ दिया गया था। पत्र में दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने आरोप लगाया गया है कि मामले में पुलिस एवं पूरी उत्तर प्रदेश सरकार की भूमिका गंभीर चिंता का विषय है क्योंकि कई दिनों तक प्रशासन ने इस मामले को गांवों के बीच का विवाद बताते हुये ढकने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अगर परिवार की अपील पर पहले ही कार्रवाई की गई होती और पीडि़ता को पहले ही दिल्ली भेजा जाता तो शायद हम अपनी एक ओर बेटी को नहीं खोते।


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