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आरबीआई ने लगाया जीडीपी में गिरावट का अनुमान, रेपो रेट 4 फीसदी पर बनाए रखा

 

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज रेपो रेट का ऐलान किया। पिछली बार की तरह इस बार भी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 4 फीसदी पर बनाए रखा। वहीं, रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर बरकरार है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि आज के फैसले में पैनल के तीन नए बाहरी सदस्यों ने मतदान किया।

रेपो रेट वह दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता हैI वहीं, बैंक जब अपने पास मौजूद राशि को आरबीआई में जमा कराते हैं तो उस राशि पर आरबीआई उन्हें ब्याज देता हैI ब्याज की इस दर को रिवर्स रेपोट रेट कहते हैंI

 

आरबीआई गवर्नर ने कहा कि मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी के सभी सदस्यों ने एकमत से रेपो रेट 4 फीसदी पर बनाए रखने का फैसला किया है। इसके साथ ही अर्थव्यवस्था के लिए "accomodative" रूख बरकरार रखा है। गवर्नर ने कहा कि जब तक जरूरत होगी आरबीआई सपोर्ट करेगी।


7 अक्टूबर को शुरू हुई आरबीआई मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी बैठक का फैसला गया है। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्य वालों मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। एमपीसी ने सर्वसम्मति से ये फैसला किया है। इससे पहले अगस्त में भी मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव ना करके उसे 4 फीसदी और रिवर्स रेपो रेट 3.35 फीसदी पर छोड़ दिया था। फरवरी 2019 से अब तक एमपीसी ने रेपो रेट में 2.50 फीसदी की बड़ी कटौती कर चुका है।

 

सरकार द्वारा तीन प्रतिष्ठित अर्थशास्त्रियों आशिमा गोयल, जयंत आर वर्मा और शशांक भिडे को आरबीआई गवर्नर की अध्यक्षता वाले एमपीसी के सदस्य के रूप में नियुक्त किए जाने के बाद यह पहली बैठक थी। आरबीआई की नई गठित मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी ने रेपो रेट को 4 प्रतिशत पर बनाए रखा है। रेपो रेट में कुछ बदलाव होगा, इस बात की उम्मीद पहले से भी कम थी। इससे पहले अगस्त में भी समिति ने पॉलिसी रेट में कोई बदलाव ना करके उसे 4 प्रतिशत और रिवर्स रेपो रेट को 3.35 प्रतिशत पर छोड़ दिया था। फरवरी 2019 से अब तक समिति ने रेपो रेट में 2.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती की है।


आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही में आई गिरावट पीछे छूट चुकी है और अब स्थिति में सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। इसलिए हम आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए अपना उदार रुख आगे भी बनाए रखेंगे। उन्होंने कहा कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारतीय अर्थव्यवस्था निर्णायक चरण में प्रवेश कर रही है। इसलिए अंकुश लगाने के बजाये अब अर्थव्यवस्था को उबारने पर ध्यान केंद्रित करने की जरूरत है। दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक मुद्रास्फीति के तय लक्ष्य के दायरे में जाने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि जीडीपी चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही तक संकुचन के रास्ते से हटकर फिर से वृद्धि के रास्ते पर सकती है और वित्त वर्ष की पहली छमाही के धीमे सुधार को दूसरी छमाही में मिल सकती है गति, तीसरी तिमाही से आर्थिक गतिविधियां बढ़ने लगेंगी।

 

सरकार ने मॉनेटरी पॉलिसी कमिटी में 7 अक्टूबर को तीन नए सदस्यों को नियुक्त किया था। इससे पहले पुराने सदस्यों का कार्यकाल खत्म होने की वजह से पॉलिसी रिव्यू को टालना पड़ा था। पहले पॉलिसी रेट का ऐलान 1 अक्टूबर को होने वाला था। इस बार कमिटी में तीन नए सदस्य हैं।

मार्च तिमाही में देश की GDP ग्रोथ निगेटिव से पॉजिटिव होने की उम्मीद : RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा, हाल में आए आर्थिक आंकड़ों से अच्छे संकेत मिल रहे हैग्लोबल इकोनॉमी में रिकवरी के मजबूत संकेत मिल रहे हैंI मैन्युफैक्चरिग, रिटेल बिक्री में कई देशों में रिकवरी दिखी हैI  खपत, एक्सपोर्ट में भी कई देशों में सुधार दिखा हैI उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्थआ में तेजी की उम्मीद बनी हुई है, हम बेहतर भविष्य के बारे में सोच रहे हैंI सभी सेक्टर में हालात बेहतर हो रहे है, ग्रोथ की उम्मीद दिखने लगी है, रबी फसलों का आउटलुक बेहतर दिख रहा हैI महामारी के इस संकट अब कोविड रोकने से ज्यादा फोकस आर्थिक सुधारों पर हैI ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है, मौजूदा वित्त वर्ष में रिकॉर्ड अनाज का उत्पादन हुआ हैI प्रवासी मजदूर एकबार फिर शहरों में लौटे हैंI ऑनलाइन कॉमर्स में तेजी आई है और लोग ऑफिस लौट रहे हैंI उम्मीद है कि फिस्कल ईयर 2021 की चौथी तिमाही के दौरान महंगाई में नरमी आएगीI

 

 


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